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गंगा को दिया गया ‘मानव’ का दर्जा , मिलेंगे सभी संवैधानिक अधिकार

पटना : अभी तक सिर्फ शास्त्रों और पुराणों में ही गंगा को देवी यानी ‘मानव’ का दर्जा दिया गया था. लेकिन ऐसा अब सच में हो गया है. उत्तर भारत की जीवनदायिनी नदी मानी जाने वाली गंगा को उत्‍तराखंड की नैनीताल हाईकोर्ट ने ‘जीवित इकाई’ माना है. इस फैसले के बाद अब गंगा नदी को भी संविधान की ओर से मुहैया कराए गए सभी अधिकार मिल सकेंगे. कोर्ट ने यह फैसला गंगा के साथ ही यमुना नदी के लिए भी दिया है.

मामले में सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने केंद्र से जल्द गंगा प्रबंधन बोर्ड बनाने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने यह आदेश हरिद्वार निवासी मो. सलीम की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है. कोर्ट ने DM देहरादून को 72 घंटे के भीतर शक्ति नहर ढकरानी को अतिक्रमण मुक्त करने के सख्त निर्देश दिए हैं.

गंगा भारत की सबसे महत्‍वपूर्ण और पौराणिक दृष्टि से पूज्‍यनीय नदी है. उत्‍तराखंड में हिमालय पर्वत श्रृंखला के गंगोत्री ग्‍लेशियर से निकलने वाली गंगा भारत के मैदानी इलाकों को सींचते हुए सीधे बंगाल की खाड़ी में गिरती है. गंगा को स्वच्छ रखने के लिए कुछ समय पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार को गंगा में पर्याप्त पानी छोड़ने और गंगा के आसपास पॉलीथीन को प्रतिबंधित करने का आदेश दिया था, लेकिन अब भी इन क्षेत्रों में पालीथीन पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जा सका है.

गंगा का उद्गम स्थल भी प्रदूषण की चपेट में है. केंद्र सरकार ने गंगा की सफाई के लिए ‘नमामि गंगे’ परियोजना भी शुरू की है.

इससे पहले हाल ही में खबर आई थी कि न्यूजीलैंड ने उत्तरी द्वीप में बहने वाली ‘वांगानुई’ नदी को एक जीवित संस्था के रूप में मान्यता देने वाला बिल पारित किया है. इसके बाद इस नदी को जीवित इकाई के रूप में मान्यता प्राप्त हो गई है और उसे इंसानों के समान अधिकार मिल गए हैं. ऐसा शायद दुनिया में पहली बार हुआ था.

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